वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज-
लखनऊ- फिरोजाबाद के बैंक आफ इंडिया की तरह ही 22 दिसंबर, 2024 की रात चिनहट की इंडियन ओवरसीज बैंक से चोरों ने लॉकरों को काटकर करोड़ों का सोना पार कर दिया था।
चोरों ने गैस कटर से 42 लॉकर काट डाले। चिनहट पुलिस ने चोरों की गिरफ्तारी के बाद अधिकांश सोना बरामद कर लिया था। चिनहट इंस्पेक्टर दिनेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि 42 में से 37 लोगों के लॉकर में रखा सामान कोर्ट के आदेश के बाद वापस कराया जा चुका है।
पांच लोगों को अब तक उनका सोना इसलिए नहीं मिल पाया है क्योंकि कोर्ट में गारंटी नहीं दाखिल कर पाए हैं। चिनहट की रहने वाली नेहा के गहने भी चोर लॉकर तोड़कर उठा ले गए थे। बरामदगी के बाद उन्हें अपने ही गहने वापस पाने के लिए महीनों तक कोर्ट के चक्कर लगाने पड़े।
उसके बाद मिले सोने की कीमत भर गांरटी भी कोर्ट में जमा करनी पड़ी। चूंकि लॉकर में अंदर क्या सामान है इसकी बैंक में कोई लिखा पढ़ी नहीं होती, इसलिए खाता धारकों को सोना क्लेम करते समय उसकी कीमत के बराबर कोर्ट में गारंटी जमा करनी पड़ी।

यह मुआवजा लॉकर के एवज में बैंक द्वारा ली जा रही वार्षिक फीस का 100 गुना होगा। अगर बैंक लॉकर के लिए 5,000 रुपये प्रति वर्ष चार्ज कर रहा है, तो लॉकर में नुकसान होने पर उसे ग्राहक को पांच लाख रुपये का मुआवजा देना होगा।
कोई भी ग्राहक बैंक के लॉकर में जेवर, दस्तावेज आदि लीगल सामान ही रख सकते हैं। इन सामानों की चोरी या कोई और दुर्घटना होने पर बैंक द्वारा नुकसान की भरपाई की जाएगी।
लॉकर में कैश, विदेशी मुद्रा, हथियार, ड्रग्स या अन्य प्रकार की दवाएं नहीं रख सकते। बैंक लॉकर में रखे गए पूरे सामान की वैल्यू पर मुआवजा मिलने को लेकर वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बैंक को नहीं पता होता है कि ग्राहक द्वारा बैंक लॉकर में क्या-क्या सामान रखा गया है।
ग्राहक से रखी चीजों की जानकारी मांगना बैंकिंग गोपनीयता नियमों के खिलाफ है। इसलिए, वस्तु-वार मूल्यांकन या बीमा संभव न होने के कारण बैंक लॉकर में रखे सामान का नुकसान होने पर भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति व्यवस्था लागू है।