वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज-
लखनऊ- साइबर थाना पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर देशभर के बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का राजफाश किया है। विभूतिखंड स्थित जेएस टावर की चौथी मंजिल में संचालित फर्जी काल सेंटर पर छापेमारी कर पुलिस ने दो सगी बहनों समेत पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया।
गिरोह पिछले करीब डेढ़ वर्ष से सक्रिय था और 250 से अधिक नौकरी तलाश रहे युवाओं को अपने जाल में फंसा चुका था। एक अभ्यर्थी से दस से बीस हजार रुपये तक वसूले जाते थे। पुलिस का अनुमान है कि गिरोह ने लाखों रुपये की ठगी की है।
अपर पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) अपराध किरन यादव ने बताया कि गिरफ्तार आरोपित जीशान खान, सतीश पाल, सोनाली चौरसिया, शिवानी वर्मा और नीलू वर्मा शामिल हैं। आरोपितों में शिवानी और नीलू सगी बहनें हैं, और जीशान गिरोह का प्रमुख है। वहीं सरगना नोएडा से बैठकर सभी को निर्देश देता था।

पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे फ्रेशवर्ल्ड.काम और शाइन.काम जैसे जाब पोर्टलों से नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों का डाटा खरीदते थे। इसके बाद काल सेंटर से युवाओं को फोन कर अमूल, अमेजन, इन्फोसिस, फ्लिपकार्ट, मैनकाइंड, सुजुकी, पार्ले और सिप्ला जैसी कंपनियों में आकर्षक वेतन पर नौकरी दिलाने का दावा किया जाता था।
विश्वास जीतने के लिए वाट्सएप पर फर्जी ज्वाइनिंग लेटर, अप्रूवल लेटर और रजिस्ट्रेशन दस्तावेज भेजे जाते थे। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फीस, गेट पास चार्ज, इंटरव्यू फीस और अन्य शुल्क के नाम पर रकम वसूली जाती थी। यह धनराशि फर्जी बैंक खातों (म्यूल खातों) में ट्रांसफर कराई जाती थी। जांच में पता चला कि काल सेंटर में इस्तेमाल मोबाइल नंबरों से जुड़े मामलों में देशभर से 60 से अधिक साइबर शिकायतें दर्ज हैं।
कई शिकायतें लाखों रुपये की ठगी से संबंधित हैं। मौके से ठगी में इस्तेमाल होने वाले 11 की-पैड मोबाइल फोन, दो एंड्रायड फोन, एक लैपटॉप, 102 डाटा शीट तथा 26 फर्जी ज्वाइनिंग लेटर, अप्रूवल लेटर और रजिस्ट्रेशन लेटर बरामद किए गए। एडीसीपी ने बताया कि साइबर थाना में आइटी एक्ट का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वहीं, गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में दो टीम लगी है।
हर महीने 20 से ज्यादा बेरोजगारों को थे फंसाते-
पुलिस ने बताया कि गिरोह हर महीने 20 से अधिक बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाता था। और फिर उन्हें नामी कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर रकम ऐंठते थे। उनसे 20 हजार रुपये तक ऐंठने के बाद उन्हें ब्लाक कर देते थे, ताकि वह दोबारा संपर्क न कर सके। कोई अगर आफिस तलाशते-तलाशते आता था, तो उसको भगा देते थे।
ज्यादा किराया देकर लिया था फ्लोर-
पुलिस ने बिल्डिंग मालिक से किराएदार के सत्यापन के बारे में जानकारी की तो उन्होंने एग्रीमेंट दिखाया। ऐसे में सत्यापन के बारे में पूछा गया तो कोई जवाब नहीं दे सके। एडीसीपी ने बताया कि पूछताछ कर गिरोह के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। अगर मकान मालिक शामिल मिलता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की अपील-
लोगों से अपील की है कि नौकरी के नाम पर मांगी जाने वाली किसी भी फीस को जमा करने से पहले कंपनी और आफर की सत्यता की जांच अवश्य करें तथा किसी भी साइबर ठगी की सूचना तत्काल हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर दें।