यूपी में सरकारी मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों को जल्द मिलेंगे 1100 सीनियर रेजीटेंड डॉक्टर, 9 जून से होगी काउंसिलिंग

वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज-यूपी में सरकारी मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों को जल्द मिलेंगे 1100 सीनियर रेजीटेंड डॉक्टर, 9 जून से होगी काउंसिलिंग

वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज-

लखनऊ। सीनियर रेजीडेंट (एसआर) डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे सरकारी मेडिकल कॉलेजों के अस्पतालों को शीघ्र 1100 डॉक्टर मिल जाएंगे। सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की नियुक्ति के लिये नौ जून से काउंसिलिंग शुरू होगी जो 15 जून तक चलेगी।

इसके बाद नीट (एनईईटी) की ऑल इंडिया रैंकिंग व एमडी, एमएस के अंक जोड़कर मेरिट बनायी जायेगी। इसके आधार पर ही कॉलेज आवंटित होंगे। राज्य के बाहर के अभ्यर्थियों के काउंसिलिंग में हिस्सा लेने पर उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाएगा। इस भर्ती काउंसिलिंग में नीट पीजी 2022 बैच के एमडी, एमएस और नीट पीजी-23 बैच के डिप्लोमा धारक को हिस्सा लेना अनिवार्य किया गया है।

दो साल सेवा करना अनिवार्य-

सरकारी मेडिकल कॉलेजों के अस्पतालों में सीनियर रेजीडेंट के 2150 पद रिक्त हैं। इसको भरने के लिये शासन ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में परास्नातक (एमडी, एमएस) करने वालों से शासकीय सेवा बांड भराना शुरू किया था। जिसमें एमडी, एमएस डॉक्टरों को सरकारी क्षेत्र में दो साल सेवा करना अनिवार्य किया गया है।

चिकित्सा शिक्षा के अधिकारियों का कहना है सीनियर रेजीडेंट पद की अर्हता रखने वाले जितने डॉक्टर इस समय उपलब्ध हैं, उनसे 1100 पद भर जाने की उम्मीद है। अगर दूसरे राज्यों के डॉक्टर काउंसिलिंग में हिस्सा लेते हैं तो संख्या बढ़ सकती है। नियुक्ति (सीट आवंटन) की प्रक्रिया 19 जून को पूरी होगी। इसके बाद तैनाती आदेश जारी होगा।

चिकित्सा शिक्षा के अधिकारियों का कहना है कि शासन ने वर्ष 2025 में प्रदेश के बाहर के डॉक्टरों को आरक्षण का लाभ देने पर रोक लगायी थी। इसी तरह राज्य में जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों को आठ लाख वार्षिक के ज्यादा मानदेय मिलता है।

यह राशि आर्थिक रूप से कमजोर (ईड्ब्ल्यूएस) वर्ग के आरक्षण के लिए निर्धारित आय सीमा से अधिक है। इसलिए सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की नियुक्ति के आरक्षण में ईड्ब्ल्यूएस श्रेणी को शामिल नहीं किया गया है।

 

 

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