एमएलसी ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि दक्षिण भारत के कई मंदिरों में सैकड़ों वर्षों से इस तरह की चोरी की घटनाएं सामने नहीं आई हैं। इसलिए वहां की व्यवस्थाओं और प्रबंधन प्रणाली का अध्ययन कर उससे सीख लेने की जरूरत है।