इस तरह की लेयरिंग के कारण पैसों के स्रोत तक पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण है। लेनदेन कई देशों और कई माध्यमों से होकर गुजरता है, इसलिए प्रत्येक कड़ी की पुष्टि करने में लंबा समय लग सकता है। प्रारंभिक जांच में नेटवर्क के तार अहमदाबाद, महाराष्ट्र, गोवा समेत पांच राज्यों से जुड़े मिले हैं। काल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारियों को पता था कि वे वैध ग्राहक सेवा नहीं बल्कि साइबर ठगी के नेटवर्क का हिस्सा हैं।

रात के समय संचालन होने के कारण गतिविधियां सामान्य काल सेंटर जैसी ही प्रतीत होती थीं और इसी वजह से लंबे समय तक किसी को संदेह नहीं हुआ। छापेमारी के दौरान संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था बबलू कुमार, डीआइजी साइबर क्राइम, विभूतिखंड थाना पुलिस, साइबर सेल और अन्य थानों का पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।

बिल्डिंग मालिक से होगी पूछताछ-

आफिस किराए पर देने वाले बिल्डिंग बिल्डिंग मालिक से भी पूछताछ की जाएगी, ताकि कार्यालय किराये पर देने से पहले सत्यापन कराया गया था या नहीं। वहीं, बरामद डाटा की मदद से यह पता लगाया जा रहा है कि अब तक इस गिरोह ने कितने लोगों को शिकार बनाया है। परिसर में पुलिस चौकी बनी है। प्रतिदिन पुलिसकर्मी तैनात रहने के बाद भी उन्हें शक नहीं हुआ। सभी लड़कियों के लिए कैब लगी थी, ताकि किसी को कोई शक न हो।

वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज-लखनऊ : अमेरिका-रूस और चाइना से होकर हवाला के जरिए आते थे ठगी के पैसे, रात में चलता था कॉल सेंटर; सुबह सभी हो जाते थे गायब