वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज-
विवेचक द्वारा तीनों आरोपितों के कोर्ट के समक्ष पेश कर चौदह दिन के लिए जेल भेजने की गुजारिश की गई। न्यायालय के समक्ष सार्थक के अधिवक्ता ध्रुव सिंह ने तर्क देकर बताया कि घटना के समय सार्थक मौके पर मौजूद नहीं था, बल्कि घटना के बाद पहुंचा था।
घटना के बारे में जानकारी होने पर आरोपित मौके से निकला-
घटना के बारे में जानकारी होने पर तुरंत ही आरोपित वहां से निकल गया। कोर्ट ने जब पुलिस की केस डायरी का अवलोकन किया तो पाया कि गवाहो ने घटना में शामिल केवल अन्य आरोपितों का नाम लिया था। किसी ने भी सार्थक की घटना में संलिप्तता नहीं बताई थी।
अपने आदेश में कोर्ट ने पाया कि सार्थक की घटना में कोई भूमिका नहीं है, लिहाजा कोर्ट ने आरोपित सार्थक के खिलाफ रिमांड को खारिज करते हुए उसे रिहा कर दिया। जबकि विष्णु स्वरूप और अभय प्रताप के खिलाफ सबूत पाते हुए उन्हें जेल भेज दिया।
