लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का भंडाफोड़, आठवीं से लेकर बीकॉम-बीटेक पास युवा चला रहे थे ठगी का गिरोह

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लखनऊ में गुरुवार को पुलिस लाइन में पत्रकारों को संबोधित करते लखनऊ के पुलिस कमिश्नर अमरेन्द्र कुमार सेंगर

वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज-

लखनऊ- समिट बिल्डिंग में संचालित अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के काल सेंटर में अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह में बड़ी संख्या में पढ़े-लिखे युवा थे। बुधवार को गिरफ्तार 119 आरोपितों में आठवीं से लेकर बीकाम, बीएससी, बीबीए, एलएलबी और बीटेक पास युवा हैं।

पुलिस आयुक्त अमरेंद्र सेंगर ने बताया कि अंग्रेजी पर पकड़ और तकनीकी जानकारी होने के कारण युवाओं के जरिये विदेशी नागरिकों को फंसाया जाता था। गुरुवार को प्रोग्राम मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम सिंह समेत सभी आरोपितों को जेल भेज दिया। जांच एजेंसियां भी जुटी हैं और अमेरिकी दूतावास को पत्र लिखा जा रहा है। गिरोह का राजफाश करने वाली टीम को एक लाख रुपये का इनाम दिया गया है।

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लखनऊ में गुरुवार को पुलिस लाइन में पत्रकारों को संबोधित करते लखनऊ के पुलिस कमिश्नर अमरेन्द्र कुमार सेंगर

साइबर क्राइम सेल की जांच में सामने आया कि गिरोह ने खुद को कारपोरेट कंपनी की तरह संगठित कर रखा था। कर्मचारियों की भर्ती में अंग्रेजी बोलने में दक्षता, अंतराराष्ट्रीय बीपीओ या कालिंग प्रोसेस का अनुभव रखने वाले युवाओं को प्राथमिकता दी जाती थी। इसलिए विभिन्न राज्यों से युवा लखनऊ बुलाए गए और उनके रहने की व्यवस्था भी थी।

गिरफ्तार लोगों में बड़ी संख्या आठवीं से लेकर स्नातक, प्रबंधन, कानून व इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले युवा हैं। कई युवाओं को बताया गया था कि वे अंतरराष्ट्रीय ग्राहक सेवा केंद्र में काम करेंगे। उन्हें आकर्षक वेतन भी मिलेगा। जांच में अधिकतर की भूमिका विदेशी नागरिकों से संपर्क कर ठगी करने में पाई गई है। गिरफ्तार 119 आरोपितों को जेल भेज दिया गया।

पुलिस काल सेंटर के मुख्य संचालक व वित्तीय लाभार्थियों की तलाश में जुटी है। बरामद 103 लैपटाप, 177 मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच की जा रही है।

अत्याधुनिक तकनीक का करते थे इस्तेमाल-
पुलिस आयुक्त ने बताया कि गिरोह अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करता था। काल सेंटर में इंटरनेट आधारित कालिंग सिस्टम, प्रतिबंधित आइबीम डायलर, फर्जी सरकारी दस्तावेज और विदेशी नागरिकों का डाटा मिला है। गिरोह के सदस्य स्वयं को अमेरिका की बड़ी कंपनियों और सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे। फिर गिफ्ट कार्ड तथा क्रिप्टोकरेंसी के जरिये रकम ऐंठते थे।

कॉल सेंटर का संचालन अलग-अलग टीमों में बांटकर होता था। डायलर टीम, बैंकर टीम और क्लोजर टीम के सदस्य अपनी-अपनी भूमिका निभाते थे। पूरे आपरेशन की निगरानी आपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी करता था।

प्रतिदिन करीब 40 लाख रुपये तक कमाई-
पुलिस का दावा है कि गिरोह भारतीय मुद्रा में प्रतिदिन करीब 40 लाख रुपये तक कमाई करता था। इस हिसाब से अबतक 250 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके है।

अमेरिका में भी गिरोह का नेटवर्क-

पुलिस ने बताया कि अमेरिका में बैठे गिरोह के मददगारों के जरिये ठगी की जाती थी। साक्ष्य एकत्रित कर अमेरिकन पुलिस से संपर्क किया जाएगा।

 

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