वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज-

लखनऊ- दिव्यांगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। पेंशन के लिए उन्हें कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसा क्यों हो रहा है और इसके लिए कौन जिम्मेदार हैं।
इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी राजधानी के डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को मिली है। विश्वविद्यालय राजधानी समेत प्रदेश के सभी जिलों में दिव्यांगों की स्थिति का आंकड़ा तैयार करेगा और उसी आधार पर उन्हें सुविधाएं मिलेंगी। सुप्रीम कोर्ट के प्रोजेक्ट एबिलिटी एंपावरमेंट के तहत प्रदेश भर के दिव्यांगों की वर्तमान स्थिति का अध्ययन किया जाएगा।
लोहिया विधि विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश के अलावा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 की पड़ताल भी करेगा। अध्ययन में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत उपलब्ध सुविधाओं, संस्थागत तंत्र, पहुंच, योग्यता, अधिकारों के संरक्षण और सरकारी योजनाओं के प्रभावी पालन का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।
दिव्यांग सूरज कुमार ने बताया कि अध्ययन से दिव्यांगों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में बदलाव होगा।
चार महीने में देनी है रिपोर्ट, कई जिलों के नोडल नियुक्त
प्रदेश में दिव्यांगों की पड़ताल कर 22 सितंबर तक केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को रिपोर्ट भेजनी है।
इसके लिए विश्वविद्यालय ने जिलेवार कुछ नोडल अधिकारियों की तैनाती कर दी है। अगले महीने से अध्ययन शुरू करेंगे। विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. इशा यादव को राजधानी के साथ ही कानपुर, कन्नौज, आगरा और मथुरा की जिम्मेदारी दी गई है।
लाइब्रेरियन डॉ. मनीष कुमार वाजपेयी को प्रयागराज, चित्रकूट, बांदा, झांसी, ललितपुर के अलावा मेरठ, गाजियाबाद, सहारनपुर, अलीगढ़, बिजनौर, प्रो. प्रेम कुमार गौतम को गोरखपुर, वाराणसी, आजमगढ़ व बलिया की जिम्मेदारी दी गई है। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मलय पांडेय को बरेली, रामपुर, मुरादाबाद और पीलीभीत की जिम्मेदारी मिली है। अन्य जिलों के नोडल भी शीघ्र तैनात होंगे।