वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज-
लखनऊ। केंद्र सरकार ने दिल्ली में जिमखाना क्लब को जब से खाली करने का नोटिस जारी किया है तब से देश के दूसरे शहरों में पाश इलाकों में मौजूद इस तरह के दूसरे क्लबों को लेकर भी चर्चा हाे रही है।
दिल्ली के बाद अब लखनऊ जिमखाना क्लब को लेकर भी बात उठी है जिसका लीज अनुबंध का मामला भी कोर्ट में विचाराधीन है।
सात हजार से अधिक सदस्यों वाला जिमखाना क्लब सामाजिक गतिविधियों के साथ ही खेलों खासकर टेनिस के लिए अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। क्लब के ग्रास कोर्ट में भारत और लेबनान के बीच डेविस कप मुकाबला भी खेला जा चुका है, इसके अलावा सर्किट के कई इंटरनेशनल टूर्नामेंट हो चुके हैं।
लखनऊ जिमखाना क्लब शहर की बेहद प्राइम लोकेशन पर है। कैसरबाग इलाके में हेरिटेज सर्किट के पास तीन बीघे से अधिक में जिमखाना क्लब का संचालन किया जा रहा है। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने 1953 में सामाजिक, सांस्कृतिक और खेल क्लब के संचालन के लिए तीन बीघे छह बिस्वा जमीन दस वर्षों की लीज पर जिमखाना क्लब को दी थी।
बंध पूरा होने के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने लीज को दस वर्षों के लिए फिर बढ़ा दिया। इसके बाद फिर से जिमखाना क्लब की तरफ लखनऊ विकास प्राधिकरण को लीज अनुबंध बढ़ाने के लिए पत्राचार किया गया लेकिन बात नहीं बनी।
एलडीए ने जिमखाना का प्रस्ताव खारिज करते हुए खाली करने काे कहा। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच पत्राचार होता रहा लेकिन लीज पर बात नहीं बनी। लीज खत्म होने के बाद भी क्लब द्वारा 1984 तक लीज रेंट प्राधिकरण के खाते में जमा किया जाता रहा।
क्लब के एक पदाधिकारी का दावा है कि एलडीए ने जुलाई 1988 को 90 वर्षो तक लीज अनुबंध की सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी थी। हालांकि एलडीए का कहना है कि लीज अनुबंध बढ़ाने का कोई आदेश जारी नहीं किया था।
क्लब के दावों के बावजूद 1989 में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने बेदखली का आदेश जारी किया जिसके खिलाफ जिमखाना क्लब ने अदालत में अपील की। अदालत ने दोनों पक्षों से यथास्थिति बरकरार रखने को कहा जो अब तक कायम है। इस दौरान कई बार क्लब द्वारा निर्माण कराने पर एलडीए द्वारा आपत्ति जाती रही है।
