वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज:-
लखनऊ- मेडिकल कालेज व ट्रामा सेंटर में सक्रिय दलाली सिस्टम एक बार फिर उजागर हुआ है। ट्रामा सेंटर में मरीजों के तीमारदारों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों में शिफ्ट कराने वाले चार दलालों को वजीरगंज पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि एक मरीज को निजी अस्पताल भेजने पर दलालों को 20 से 25 हजार रुपये तक का कमीशन मिलता था।
पुलिस के मुताबिक यह गिरोह ट्रामा सेंटर, लारी कार्डियोलाजी और मानसिक रोग विभाग के आसपास घूमता रहता था। तीमारदारों को परेशान या घबराया हुआ देखकर उनसे बातचीत शुरू करते और उन्हें दवाइयों के नाम पर गुमराह करते थे। कई मामलों में मरीज की हालत गंभीर बताकर निजी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए दबाव बनाते थे।

इंस्पेक्टर राजेश त्रिपाठी ने बताया कि इस गिरोह की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इसके बाद पुलिस करीब दस दिनों से इनकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। सोमवार को टीम अस्पताल के ओपीडी परिसर में पहुंची तो चारों युवक तीमारदारों से दवा खरीदने को लेकर विवाद करते मिले। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें मौके से पकड़ लिया।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान मुस्तकीम खान निवासी शाहगंज नक्कास चौक, मो. अफजल निवासी मौनीपुरवा दौलतगंज हुसैनाबाद, शहजान निवासी पानी की टंकी हुसैनाबाद और साकिब निवासी गेंदखाना पानी की टंकी हुसैनाबाद के रूप में हुई है। पुलिस ने चारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है।
सभी दलालों के पास खुद की एंबुलेंस-
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्यों के पास अलग-अलग एंबुलेंस हैं, जिनके जरिए मरीजों को तुरंत निजी अस्पताल ले जाया जाता था। आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि शहर के कुछ निजी अस्पतालों से उन्हें कमीशन मिलता था। यदि किसी अस्पताल से भुगतान नहीं मिलता तो कई बार विवाद और मारपीट तक की नौबत आ जाती थी। पुलिस के अनुसार गिरोह में अन्य लोग भी शामिल हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
अस्पतालों की व्यवस्था पर भी उठे सवाल-
सरकारी अस्पतालों में इस तरह दलालों की सक्रियता ने व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल परिसर में खुलेआम घूमने वाले ऐसे लोग अक्सर परेशान परिवारों को झांसे में ले लेते हैं। गंभीर मरीजों के नाम पर उन्हें निजी अस्पताल ले जाने का दबाव बनाया जाता है। उनका कहना है कि अस्पतालों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था सख्त हो तो ऐसे दलालों पर आसानी से रोक लग सकती है।