यूपी : अवैध बिल्डिंगों को कनेक्शन देना भी बिजली विभाग की मजबूरी, सर्टिफाइड नक्शा होने पर देना होगा Connection

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वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज-यूपी : अवैध बिल्डिंगों को कनेक्शन देना भी बिजली विभाग की मजबूरी, सर्टिफाइड नक्शा होने पर देना होगा Connection

वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज-

 लखनऊ- अलीगंज अग्निकांड के बाद से अवैध बिल्डिंग में बिजली कनेक्शन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बिजली विभाग का कहना है कि अवैध बिल्डिंगों में भी कनेक्शन देना मजबूरी है। बिजली विभाग तब तक कनेक्शन देने से मना नहीं कर सकता जब तक उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड अपने 10 जुलाई 2024 को जारी आदेश में बदलाव नहीं कर देता, क्योंकि आदेशों में स्पष्ट रूप से लिखा है कि अगर आवेदनकर्ता प्राधिकरण, नगर निगम, नगर पालिका या ग्राम पंचायत द्वारा अनुमोदित मानचित्र नहीं दे पाता है तो आवेदनकर्ता से पंजीकृत आर्किटेक्ट द्वारा प्रमाणित मानचित्र भी बिजली कनेक्शन के लिए पर्याप्त है।

यही नहीं अगर वह भी नहीं मिलता है तो आवेदनकर्ता स्व: प्रमाणित मानचित्र दे सकता है लेकिन नोटराइज्ड शपथ पत्र पर कुछ शर्तों को उसमें जोड़ा गया है। इसके बाद बिजली विभाग विद्युत सुरक्षा निदेशालय से एनओसी मिलते ही कनेक्शन भी जारी कर देगा।

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के नियमों को उपभोक्ताओं के हितों को देखते हुए शिथिल बनाया गया है, जिससे बिजली जैसी मूलभूत सुविधा आसानी से सुलभ हो सके। यही नहीं पहले उपभोक्ता को बीस किलोवाट का कनेक्शन लेने के लिए 25 किलोवाट का ट्रांसफार्मर लगवाने के लिए एस्टीमेट बनवाना पड़ता था, अब यह व्यवस्था भी खत्म कर दी है।

पचास किलोवाट तक बिजली कनेक्शन एलटी लाइन से ले सकता उपभोक्ता-

उपभोक्ता पचास किलोवाट तक बिजली कनेक्शन एलटी लाइन से ले सकता है। इसके लिए उसे ट्रांसफार्मर व एस्टीमेट बनवाने की प्रकिया को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता सुरेश बहादुर सिंह ने बताया कि अगर शासन का निर्देश है कि अवैध बिल्डिंगों में कनेक्शन न दिया जाए तो इसके लिए नियमों में बदलाव करके किया जा सकता है।

उनके मुताबिक पहले पचास किलोवाट का कनेक्शन लेने के लिए ट्रांसफार्मर लगवाना पड़ता था और लाखों रुपये उपभोक्ता को खर्च करने पड़ते थे, सरकार ने तो उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए नियमों का सरल किया था।

लोड बढ़ने पर जुर्माने का नियम, तीन माह बाद ही बढ़ा सकते हैं बिजली का लोड-

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक अगर किसी परिसर में लगातार तीन माह तक स्वीकृत लोड से बिजली की डिमांड ज्यादा होती है तो बिजली विभाग उपभोक्ता को नोटिस भेजेगा। इसके बाद ही लोड बढ़ाएगा। तीन माह तक सिर्फ पेनाल्टी ही बिल में लगाकर भेज सकता है। बिजली की डिमांड तुरंत बढ़ने से किसी भी अभियंता को यह अधिकार नहीं है कि उपभोक्ता का लोड सीधे बढ़ा दे।

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