लखनऊ में भैंसों की नीलामी के दौरान मारपीट और सड़क जाम, 12 लोग गिरफ्तार

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भैंसों की नीलामी के दौरान मारपीट और सड़क जाम

वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज-

लखनऊ- नीलामी तो 243 भैंसों की होनी थी लेकिन उसमें राजनीतिक रंग दिखाई दिया। सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक समय समय पर हंगामा होता रहा। जिन अवैध डेयरी संचालकों की भैंसों को पकड़कर लाया गया था, वह नीलामी का विरोध कर रहे थे और कह रहे थे नीलामी में बाहरी जिलों से कसाई भी शामिल हुए हैं।

संचालकों के समर्थन में समाजवादी पार्टी की टीम मौजूद थी। नीलामी में शामिल कुछ ने सपा नेताओं पर आरोप लगाया कि वह अपने लोगों को ही बोली लगाने का मौका दे रहे हैं। इसकी पुलिस भी शिकायत की गई।

पश्चिम विधानसभा सीट से विधायक अरमान खान के अलावा सपा पार्षद मौजूद थे तो मध्य क्षेत्र से सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने पत्र लिखकर नीलामी को स्थगित करने की मांग की। उधर, डेयरी संचालकों के समर्थन में मुलायम यूथ ब्रिगेड के कार्यकर्ता नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन कर रहे थे।

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भैंसों की नीलामी के दौरान मारपीट और सड़क जाम

आरोप लगा रहे थे कि साजिश के तहत नीलामी की जा रही है और भैंसों को खरीदने वालों में कई कसाई भी शामिल हैं, जो बाहरी जिलों से आए हैं। विरोध के चलते नगर निगम नीलामी को दुविधा में था।

दो बजे से नीलामी चालू होनी थी, जो 30 मिनट देर से शुरू हुई और पुलिस से कहा गया कि जिन्हें नीलामी में भाग लेने का टोकन (एक लाख की जमानती राशि जमा करने पर) दिया गया है, उसे ही नीलामी के सभागार में ही रहने दिया जाए, इसके बाद पुलिस ने सभी को बाहर कर दिया।

तीन बजे के करीब डेयरी संचालक मुलायम यूथ ब्रिगेड के बैनर पर नगर निगम मुख्यालय बाहर सड़क जाम कर प्रदर्शन करने लगे। इससे सड़क पर वाहनों का आवागमन ठप हो गया। पुलिस बल के साथ पहुंचे एसीपी हजरतगंज रजनीश वर्मा और प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज विक्रम सिंह ने प्रदर्शनकारियों को समझाना चाहा लेकिन वह पुलिस से भिड़ गए और मारपीट तक की नौबत आ गई।

कुछ ने इन अधिकारियों के इसके बाद हरकत में पुलिस आई तो काफी संख्या में प्रदर्शनकारी लालबाग की तरफ भागते दिखे, जबकि पुलिस बारह प्रदर्शनकारियों को पकड़ कर ले गई। इसके बाद सड़क पर आवागमन चालू हो सका लेकिन नीलामी प्रक्रिया पूरी होने तक नगर निगम मुख्यालय छावनी बना रहा।

नगर निगम मुख्यालय को घेरे रहे डेयरी संचालक-

भैंसों की नीलामी किए जाने के विरोध में डेयरी संचालकों ने सोमवार को नगर निगम मुख्यालय को घेर लिया। उनका आरोप था कि पारा से मनमाने तरह से भैंसों को पकड़ा गया था और बाहर से खरीदार भी आए हैं, जो कसाई हैं और भैंसों को ले जाकर काट देंगे।

कुछ दिन पहले नगर निगम की टीम भैंसों को पकड़ने के लिए पारा क्षेत्र में गई थी लेकिन वहां पर पथराव विरोध होने के कारण टीम को बैरंग होना पड़ा था। पथराव में नगर निगम के कर्मचारियों के अलावा पुलिस कर्मचारी भी घायल हो गए थे। पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया था जिसमें दो महिलाएं भी हैं।

इसके बाद महापौर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार खुद पुलिस और नगर निगम की टीम के साथ मौके पर गए थे और 195 भैंसों को पकड़ा था। पुलिस ने भी कई डेयरी संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था, जिसमें दो महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

बाहर से आए लोगों की गई पिटाई-

डेयरी संचालकों ने उन्हें पीटा जो बाहर से नीलामी में भाग लेने आए थे। आरोप लगाया कि कसाई हैं। उसका आधार कार्ड व नीलामी से जुड़े अभिलेखों को भी फेंक दिया गया। सुरक्षा कर्मचारियों ने नीलामी में शामिल होने वाले बाहरी लोगों को बचाया।
कांजी हाउस के हिसाब से हुई नीलामी

  • कुल भैंसे- 243
  • नीलामी से जमा रकम- 58,89,000 रुपये
  • ऐशबाग कांजीहाउस 21 भैंसें – 5,51,000 रुपये
  • ठाकुरगंज कांजी हाउस 40 भैंसे- 12,01000 रुपये
  • आलमबाग कांजी हाउस 33 भैंसे- 7,06000 रुपये
  • पीजीआई कांजी हाउस 31 भैंसे- 9,51,000 रुपये
  • कान्हा उपवन 72 भैंसे- 15,13,000 रुपये
  • राधा उपवन 46 भैंसे- 9,67,000 रुपये

नगर निगम ने 21 हजार रुपये तय किया गया था लेकिन नीलामी 24,500 रुपये तक गई। वैसे जानकारों का कहना था कि डेयरी की भैंस थी तो उसकी कीमत बाजार में 80 हजार से एक लाख तक होती। इसलिए भी खरीददार अधिक थे।

 

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