‘पापा, मुझे बचा लो’ कहकर सुखमनी ने लखनऊ अग्निकांंड में गंवाई जान, बेटे की आखिरी कॉल के बाद आया पार्थिव शरीर; अरदास के बाद दी विदाई

वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज-'पापा, मुझे बचा लो' कहकर सुखमनी ने लखनऊ अग्निकांंड में गंवाई जान, बेटे की आखिरी कॉल के बाद आया पार्थिव शरीर; अरदास के बाद दी विदाई वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज-'पापा, मुझे बचा लो' कहकर सुखमनी ने लखनऊ अग्निकांंड में गंवाई जान, बेटे की आखिरी कॉल के बाद आया पार्थिव शरीर; अरदास के बाद दी विदाई
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वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज-

लखनऊ- अलीगंज स्थित एनिमेशन प्रशिक्षण संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड ने आलमबाग के आदर्श नगर निवासी एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं।

हादसे में जान गंवाने वाले 23 वर्षीय सुखमनी सिंह का रविवार को गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। विप रोड स्थित श्मशान घाट पर परिवार, रिश्तेदारों, मित्रों और क्षेत्रवासियों ने नम आंखों से उसे अंतिम विदाई दी।

आत्मा की शांति के लिए गुरुद्वारे में अरदास-

अंतिम संस्कार से पूर्व गुरुद्वारे में सुखमनी की आत्मा की शांति के लिए अरदास की गई। अरदास के दौरान मौजूद लोगों की आंखें नम थीं। जैसे ही सुखमनी का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए पहुंचा, परिजनों का दर्द फूट पड़ा।

मां किरन कौर बार-बार बेटे को याद कर बेसुध हो जा रही थीं। वह बिलखते हुए कह रही थीं, “बेटा सुबह जाते समय बोला था, मां आज देर से आऊंगा… क्या पता था कि वह अब कभी लौटकर नहीं आएगा।”

गुरुद्वारा में अरदास के बाद अंतिम विदाई-

मां की यह पीड़ा सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं। पिता प्रभजोत सिंह, जो सेना की एएमसी में कार्यरत हैं, पूरे समय गहरे सदमे में दिखाई दिए। वहीं बड़ा भाई सायबान सिंह भी अपने आंसू नहीं रोक सका। परिवार के सपनों का सहारा रहा सुखमनी अब केवल यादों में रह गया है।

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मां का रो-रोकर बुरा हाल-

हाल ही में सेना से सेवानिवृत्त हुईं किरन कौर और उनके पति ने बेटे के उज्ज्वल भविष्य के लिए अनेक सपने संजोए थे। सुखमनी एनिमेशन के क्षेत्र में अपना करियर बनाने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि वह अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर एक सफल मुकाम हासिल करेगा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

पड़ोसियों और परिचितों ने बताया कि सुखमनी बेहद मिलनसार, विनम्र और संस्कारी युवक था। वह सभी का सम्मान करता था और पढ़ाई के प्रति गंभीर रहता था। उसके असमय निधन से आदर्श नगर सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।

हर चेहरे पर दर्द-

अंतिम यात्रा के दौरान माहौल इतना भावुक था कि हर आंख नम थी। लोगों के चेहरों पर दर्द और मन में एक ही सवाल था कि आखिर ऐसी लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है। एक होनहार युवक की मौत ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।

आखिरी बात याद करते हैं-

प्रभुज्योत सिंह फ़ोन पर अपने बेटे से हुई आख़िरी बात को याद करते हैं. वह कहते हैं, ”दोपहर करीब दो बजे बेटे का फोन आया. उसने कहा, ‘पापा, आग लग गई है, मुझे बचा लो, मैं अंदर फंस गया हूं.’ हम तुरंत निकले, एम्बुलेंस को भी फोन किया, लेकिन जब तक पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी.”

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