लखनऊ: सिर पर टीका, हाथ में कलावा बांधकर क्लीनिक चला रहा था बांग्लादेशी नागरिक, पुलिस कर रही जां

वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज:- लखनऊ- सिर पर टीका, हाथ में कलावा बांधकर क्लीनिक चला रहा था बांग्लादेशी नागरिक, पुलिस कर रही जांच वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज:- लखनऊ- सिर पर टीका, हाथ में कलावा बांधकर क्लीनिक चला रहा था बांग्लादेशी नागरिक, पुलिस कर रही जांच
वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज:- लखनऊ- सिर पर टीका, हाथ में कलावा बांधकर क्लीनिक चला रहा था बांग्लादेशी नागरिक, पुलिस कर रही जांच

वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज:- 

 लखनऊ- बीकेटी इलाके में वर्षों से पहचान छिपाकर रह रहे बांग्लादेशी नागरिक अरूप बख्शी का मामला सामने आने के बाद पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

सिर पर टीका, हाथ में कलावा और क्लीनिक में मंदिर बनाकर वह खुद को हिंदू बताता रहा, लेकिन स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र को इसकी भनक तक नहीं लगी।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर फर्जी दस्तावेजों के सहारे उसने पासपोर्ट तक कैसे बनवा लिया और पुलिस सत्यापन में उसे क्लीन चिट किसने दी। मुकदमा दर्ज होने के 24 घंटे बाद भी पुलिस कर्मियों का पता नहीं लगा सकी।

बीकेटी थाना क्षेत्र के बरगदी स्थित अस्ती रेलवे क्रासिंग के पास अरूप बख्शी ‘बंगाली चांदसी क्लीनिक’ के नाम से क्लीनिक चला रहा था। स्थानीय लोगों के मुताबिक वह सुबह पूजा-पाठ करता था और क्लीनिक में मंदिर भी बना रखा था, ताकि किसी को उस पर शक न हो।

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घर में भी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी थीं। लोगों का कहना है कि वह कई वर्षों से इलाके में रह रहा था और कई लोगों का हाइड्रोसील आपरेशन तक कर चुका है। इसके अलावा प्रापर्टी डीलिंग का काम भी करता था।

पुलिस जांच में सामने आया कि अरूप वर्ष 2012 में बांग्लादेश से अवैध तरीके से भारत आया था। वह नेपाल के रास्ते लखीमपुर पहुंचा और बाद में सीतापुर में रहने लगा। इसी दौरान उसने मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज बनवा लिए।

वर्ष 2016 में उसने पासपोर्ट भी हासिल कर लिया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पासपोर्ट सत्यापन के दौरान किस पुलिसकर्मी और एलआइयू कर्मी ने रिपोर्ट लगाई थी। मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अरूप लंबे समय से खुलेआम क्लीनिक चला रहा था, लेकिन पुलिस और खुफिया एजेंसियां उसकी गतिविधियों से अनजान रहीं।

सीतापुर पुलिस से इनपुट मिलने के बाद जब बीकेटी पुलिस ने जांच शुरू की तो परतें खुलती चली गईं। हालांकि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से आरोपित फरार है और पुलिस अब उसकी तलाश में दबिश दे रही है।

इंस्पेक्टर संजय कुमार सिंह ने बताया कि 16 मई की रात उपनिरीक्षक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपित की तलाश की जा रही है और फर्जी दस्तावेज बनाने में मदद करने वालों की भी जांच की जा रही है।

24 घंटे बाद भी पुलिस जांच का दे रही हवाला-

बांग्लादेशी के यहां पर रहने की जानकारी मिली, तो पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। हालांकि
अभी तक यह नहीं पता सकी है कि वह कैसे यहां पर पहुंचा। साथ ही यह भी मुकदमा दर्ज करने के 24 घंटे बाद यह भी पता लगी सकी किन पुलिसकर्मियों ने उसमें रिपोर्ट लगाई थी। फिलहाल इस प्रकरण के बाद बीकेटी पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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