यूपी में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के नियमों में बड़ा बदलाव, देरी से रजिस्ट्रेशन पर बढ़ा शुल्क

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वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज:- 

लखनऊ- प्रदेश सरकार ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम-1969 में संशोधन करते हुए कई बदलाव किए हैं। जन्म से 21 दिन के बाद पंजीकरण कराने पर विलंब शुल्क अब पहले से ज्यादा देना होगा।

21 से 30 दिन के अंदर पंजीकरण कराने पर दो रुपये की जगह अब 20 रुपये, 30 दिन से एक साल के अंदर पंजीकरण कराने पर पांच रुपये की जगह 50 रुपये, जबकि एक साल बाद पंजीकरण कराने वालों पर 10 रुपये की जगह 100 रुपये देने होंगे।

एक वर्ष से ज्यादा देरी पर पंजीकरण में जिला मजिस्ट्रेट या एसडीएम से भी अनुमति लेनी होगी। सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई।

केंद्र सरकार ने 31 मई 1969 को जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम जारी किया था। इसका संशोधन वर्ष 2023 में जारी किया गया था। प्रदेश ने 11 अगस्त 2023 को इसकी नियमावली बनाई। अब उस नियमावली में कैबिनेट ने संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।

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अगर जन्म के समय बच्चे का पंजीकरण कर लिया गया, लेकिन नामकरण नहीं हुआ तो माता-पिता को 12 माह के अंदर रजिस्ट्रार को सूचित करना होगा। 12 माह से 15 वर्ष के अंदर नाम समेत पंजीकरण कराने पर अर्थदंड लगेगा। अगर नाम या पंजीकरण की किसी जानकारी में कोई त्रुटि रह गई तो जिला रजिस्ट्रार को आवेदन देकर संशोधन किया जा सकेगा।

जन्म या मृत्यु पंजीकरण प्रमाण पत्र खोने पर प्रथम एक वर्ष में एक आवेदन के लिए दो की जगह 20 रुपये, हर अतिरिक्त वर्ष के लिए दो की जगह 20 रुपये, प्रत्येक जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए पांच की जगह 50 रुपये देने होंगे। जन्म एवं मृत्यु के रजिस्टर स्थायी महत्व के अभिलेख होंगे, जिसे किसी भी स्थिति में अभिन्न अंग होंगे।

प्रदेश के 75 जिलों में जन्म मृत्यु पंजीकरण कार्यक्रम का मुख्य जिम्मा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज एवं स्थानीय निकाय का है। प्रदेश स्तर पर मुख्य रजिस्ट्रार, मंडल स्तर पर अपर मुख्य रजिस्ट्रार एवं जिलों में जिला रजिस्ट्रार की भूमिका होती है।

प्रदेश में 57,694 ग्राम पंचायतें, 17 नगर निगम, 200 नगर पालिका परिषद, 545 नगर पंचायत, 13 छावनी परिषद, आठ औद्योगिक क्षेत्र और 27,141 राजकीय चिकित्सा इकाइयां समेत कुल 85,618 इकाइयां जन्म पंजीकरण कराती हैं।

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