गर्भवती और नई माताओं के लिए ऐसे सहारा बनीं हैदराबाद की शिवम्मा

वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज:-कोरोना काल में आंगनबाड़ी कर्मी नए अभिभावकों को शिशु की देखभाल संबंधित मार्गदर्शन भी नहीं दे सकते थे। ऐसी स्थिति में भी शिवम्मा ने अपने क्षेत्र की महिलाएं से संपर्क में रहना नहीं छोड़ा।

वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज:-कोरोना काल में आंगनबाड़ी कर्मी नए अभिभावकों को शिशु की देखभाल संबंधित मार्गदर्शन भी नहीं दे सकते थे। ऐसी स्थिति में भी शिवम्मा ने अपने क्षेत्र की महिलाएं से संपर्क में रहना नहीं छोड़ा।

कोरोना काल में भारत में लोग घरों में बंद थे। संक्रमण से बचाव के लिए लोग घर से बाहर नहीं निकल सकते हैं। उन्हें ये नहीं पता था कि अन्य किसी समस्या के लिए वह किस ओर रुख करें। उनकी मदद कौन करेगा। तेलंगाना की स्थिति भी ऐसी ही थी। ऐसे महिलाएं जो घर परिवार और शिशु का ध्यान रखने के कारण खुद की देखरेख को भूल जाती हैं, उनके लिए एक आवाज सहारा बनी। ये आवाज पिछले दस वर्षों से तेलंगाना की महिलाओं के सहयोग के लिए गूंजती आ रही है। लेकिन कोरोना काल में जब सब कुछ बंद था। लोग एक दूसरे से मिल भी नहीं सकते थे, तब भी यह आवाज लोगों के कानों में मदद बनकर पहुंची। यह आवाज है हैदराबाद की शिवम्मा की। आइए जानते हैं आंगनबाड़ी कार्यकत्री शिवम्मा के बारे में।

कौन है शिवम्मा?

शिवम्मा हैदराबाद की रहने वाली हैं। वह एक समर्पित और मेहनती आंगनबाड़ी कर्मी हैं। आंगनबाड़ी में कार्यरत शिवम्मा पिछले दस वर्षों से महिलाओं और बच्चों के सेहत और विकास के लिए कार्य कर रही हैं। शिवम्मा कहती हैं कि वह हमेशा से लोगों की मदद करना चाहती थीं, और एक आंगनबाड़ी कर्मी के रूप में वह बच्चों और महिलाओं तक पहुंच सकती हैं।

शिवम्मा की तरह पूरे भारत में कार्यकर्ता महिलाओं और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। जब कोविड महामारी का दौर आया तो लॉकडाउन के कारण सभी घरों में रहने को मजबूर थे, तभी भी आंगनबाड़ी कर्मी अपने कार्य में जुटी हुई थीं। शिवम्मा ने इस दौरान स्तनपान कराने वाली महिलाएं की मदद के लिए कार्य किया।

कोरोनाकाल में आवाज से दिया सहारा

लॉकडाउन के बाद आंगनबाड़ी केंद्र पहले की तरह क्षेत्र की माताओं और बच्चों को गर्भ भोजन नहीं दे पा रहे थे। वहीं आंगनबाड़ी कर्मी नए अभिभावकों को शिशु की देखभाल संबंधित मार्गदर्शन भी नहीं दे सकते थे। ऐसी स्थिति में भी शिवम्मा ने अपने क्षेत्र की महिलाएं से संपर्क में रहना नहीं छोड़ा। वह गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं से फोन के जरिए हाल चाल लेती रहीं।

शिवम्मा ने कोरोना महामारी के दौर में सरकार द्वारा जारी परामर्श निर्देशिका की मदद से फोन पर महिलाओं को परामर्श दिए। वह नई माताओं और गर्भवती महिलाओं को रोज कम से कम तीन से चार बार फोन करती हैं। लगभग 15 मिनट की फोन काॅल पर शिवम्मा सेहत, नवजात की देखभाल और स्तनपान के बारे में जानकारी देती हैं।

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