वॉयस ऑफ ए टू जेड न्यूज:-
लखनऊ- इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार को जानलेवा मांझा के निर्माण, बिक्री और प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि जानलेवा मांझा से होने वाली घटनाओं को नहीं रोका गया, तो वह पीड़ितों के इलाज का खर्च और मुआवजा दिलाने के लिए बाध्य होगा।
यह आदेश जस्टिस राजन राय और जस्टिस एके चौधरी की पीठ ने जानलेवा मांझा पर रोक लगाने की मांग वाली एक जनहित याचिका पर पारित किया। इस मामले में चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस जसप्रीत सिंह की पीठ ने भी सुनवाई की और सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करने का आदेश दिया।

सुनवाई के दौरान सरकार ने बताया कि जानलेवा मांझा पर रोक लगाने के लिए 10 फरवरी, 2026 को शासनादेश जारी किया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि केवल शासनादेश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे कानूनी प्रविधानों के माध्यम से रोकना होगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि फरवरी महीने में लगभग दस लोग जानलेवा मांझा से घायल हुए या उनकी मृत्यु हुई।
कोर्ट ने कहा कि जब गंभीर चोटें या मृत्यु की घटनाएं होती हैं, तब ही अधिकारी सक्रिय होते हैं। कोर्ट ने उन जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की आवश्यकता जताई, जो जानलेवा मांझा की बिक्री पर रोक नहीं लगा पाते।